भारत की राष्ट्रपति ने भुवनेश्वर में ब्लैक स्वान समिट, इंडिया में भाग लिया
भारत की फिनटेक यात्रा को केवल प्रौद्योगिकी की गाथा के रूप में नहीं बल्कि परस्पर लैंगिक न्याय के रूप में भी याद किया जाना चाहिए: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रौद्योगिकी सामाजिक न्याय और समावेशन का माध्यम बने: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों से कहा
राष्ट्रपति भवन : 06.02.2026
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 6 फरवरी, 2026 ओड़िशा सरकार द्वारा ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के सहयोग से भुवनेश्वर, ओड़िशा में आयोजित ब्लैक स्वान समिट, इंडिया में भाग लिया।
इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हम प्रौद्योगिकी के अभूतपूर्व गति से विकास के दौर से गुजर रहे हैं। नए आविष्कार इतनी तेजी से किए जा रहे हैं कि हमारी प्रणालियाँ, कौशल और व्यावसायिक मॉडलों को अक्सर इनके साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष करना पड़ता है। साथ ही, इस तीव्र विकास के साथ साइबर सुरक्षा खतरों, डीपफेक, गलत सूचना और प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता जैसी अनेक गंभीर चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। तीव्र तकनीकी परिवर्तनों का नवाचार और विकास पर बहुत बड़ा सकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। ब्लैक स्वान समिट जैसे आयोजनों के माध्यम से, कौशल विकास के द्वारा क्षमताओं को और बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और डिजिटल एवं वित्तीय परिवर्तन को गति देने में प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने हेतु नवीन तरीकों का पता लगाया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की वित्तीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण क्रांति हुई है। बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं द्वारा डिजिटल भुगतान आम बात हो गई है। उनके लिए, "फिनटेक" केवल एक तकनीक नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
राष्ट्रपति ने कहा भारत की फिनटेक यात्रा को केवल प्रौद्योगिकी की गाथा के रूप में नहीं बल्कि परस्पर लैंगिक न्याय के रूप में भी याद किया जाना चाहिए। महिला एक ऐसा महत्वपूर्ण वर्ग है जिन पर फिनटेक को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान देना आवश्यक है। फिनटेक इकोसिस्टम उन्हें केवल अंतिम उपयोगकर्ताओं के रूप में ही नहीं, बल्कि अग्रणी-व्यक्तियों, पेशेवरों और उद्यमियों के रूप में भी देखे। किसी भी नए प्लेटफॉर्म, उत्पाद या नीति द्वारा यह मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है कि क्या यह महिलाओं की डिजिटल और वित्तीय इकोसिस्टम में सक्रिय भागीदारी बढ़ाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि फिनटेक अपने आप में समावेशन की गारंटी नहीं देता है। फिर भी विशेष रूप से दूरस्थ, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे नागरिक हैं जो डिजिटल उपकरणों के उपयोग से परिचित नहीं हैं। विकास यात्रा का भागीदार बनाने के लिए उन्हें कौशल प्रदान करना बहुत आवश्यक है। तभी फिनटेक समावेशन, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने में अग्रणी बन सकता है। उन्होंने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रौद्योगिकी सामाजिक न्याय और समावेशन का माध्यम बने।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों और समाज के सभी वर्गों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की अपार क्षमता रखती है। हालांकि, कई बार इसका दुरुपयोग वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। ऐसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए जनता को जागरूक और सतर्क करना आवश्यक है। भारत सरकार ने ऐसी धोखाधड़ी को रोकने और उसके बारे में सूचित करने के अनेक उपाय किए हैं और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र स्थापित किए हैं। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है जिससे बच्चे कम उम्र में ही प्रौद्योगिकी के लाभ और हानि को समझा जा सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि कौशल विकास को बढ़ावा देना, वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करना और नवाचार क्षमता को बढ़ाना मानव पूंजी में निवेश करना है। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ओड़िशा सरकार ने डिजिटल, वित्तीय और बीमा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और नवाचार इकोसिस्टम तैयार करने के लिए भारतनेत्र कार्यक्रम चलाया है। उन्होंने भारतनेत्र पहल के अंतर्गत ब्लैक स्वान शिखर सम्मेलन के सह-आयोजन के लिए ओड़िशा सरकार और ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क की प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं के परिणामों और सहयोग का केवल ओड़िशा ही नहीं बल्कि भारत और विश्व पर परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ेगा।
